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आमों के जंगल के बीच, दो सबसे अच्छे दोस्त रहते थे — खरगोश बंटी और गिलहरी जंपी
दोनों के घर आम के पेड़ पर पास-पास बने हुए थे।

हर सुबह वे आम के पेड़ के नीचे मिलते और नाश्ते में खाते थे मीठे जामुन और कुरकुरे मेवे।

एक दिन, जंपी पेड़ की जड़ों के पास खुदाई कर रहा था।

तभी वह चिल्लाया, “बंटी! जल्दी आओ!”

बंटी कूदते हुए आया और देख कर दंग रह गया।
जंपी के नन्हे पंजों में था एक नीला चमकता हुआ कंकड़!

“ये तो बहुत चमकदार है! ये है क्या?” बंटी ने पूछा।

तभी वह कंकड़ और तेज़ चमकने लगा और हवा में एक हल्की सी गुनगुनाहट फैल गई।
पत्ते सरसराने लगे जबकि हवा चली ही नहीं!

जंपी की आँखें फैल गईं। “मुझे लगता है… ये जादुई है!”

दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे।

तभी झपाक! — एक सुनहरी रौशनी चमकी और हवा में एक छोटा सा नक्शा दिखाई देने लगा!

“ये क्या… खज़ाने का नक्शा है?” जंपी ने धीरे से पूछा।

बंटी मुस्कराया। “लगता है हमारी असली कहानी अब शुरू होने वाली है।”

और बस, वो जंगल जो उनका घर था… अब बन गया था एक जादुई रहस्य की दुनिया।

जारी रहेगा अध्याय 2 में: फुसफुसाती झाड़ी....................

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