
एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में मीरा नाम की एक 8 साल की प्यारी सी लड़की रहती थी। वह हमेशा अपने साथ एक रंग-बिरंगी डायरी रखती थी जिसमें वह दिलों को जोड़ने वाली अदृश्य डोरियाँ बनाती थी।
मीरा को लगता था कि हर इंसान एक-दूसरे से किसी न किसी भावना से जुड़ा होता है, चाहे वो दिखे या न दिखे।
मीरा गाँव में रहने वाले सभी लोगो से बहुत प्यार करती थी और सबका आदर करती थी l
गाँव के बच्चे कभी-कभी उसका मज़ाक उड़ाते थे,
“डोरियाँ जोड़कर क्या होगा?”
“तू कोई जादूगर है क्या?”
पर मीरा मुस्कुरा देती और अपनी डायरी में और डोरियाँ बना देती।
दो अच्छे दोस्त — अयान और तारा — किसी बात पर बहुत नाराज़ हो गए और बोलना बंद कर दिया। सभी परेशान थे, पर किसी के पास कोई हल नहीं था।
मीरा चुपचाप अपने घर गई। उसने अपनी डायरी में तीन डोरियाँ बनाईं — एक अयान के लिए, एक तारा के लिए और एक अपने लिए। फिर उसने एक टोकरा लिया, उसमें तीन लड्डू रखे, और एक छोटा सा प्यारा नोट लिखा:
"डोरी टूटी है, पर जोड़ सकते हैं — एक मीठा रिश्ता फिर से बना सकते हैं।"
अगले दिन उसने वो टोकरा चुपचाप स्कूल की बेंच पर रख दिया जहाँ अयान और तारा बैठते थे।
जब दोनों ने टोकरा देखा और नोट पढ़ा, तो कुछ देर तक सब शांत था।
फिर तारा मुस्कराई, अयान ने धीरे से सिर हिलाया — और दोनों ने लड्डू खा लिए।
मीरा दूर खड़ी मुस्कुरा रही थी।
उस शाम सभी बच्चे गाँव के पुराने बरगद के पेड़ के नीचे बैठे थे। मीरा ने फिर अपनी डायरी खोली — और डोरियाँ अब और भी चमक रही थीं।
कभी-कभी सबसे मजबूत डोरियाँ वो होती हैं जो आँखों से नहीं, दिल से दिखाई देती हैं।
कहानी की सीख :
"हमारे रिश्ते दिखाई नहीं देते, पर वो सबसे कीमती होते हैं। छोटी-छोटी कोशिशें, बड़ी भावनाओं को जोड़ सकती हैं।"