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बहुत समय पहले की बात है, जहाँ पहाड़ बादलों को छूते थे और पेड़ों की उचाइयों  पर तारे झिलमिलाते थे, वहाँ एक झील थी जो चाँद की तरह गोल थी। लोग उसे “चाँद झील” कहते थे।

यह झील आधी रात को ही चमकती थी, और कहा जाता था कि यह किसी एक  इच्छा को पूरा कर सकती है—पर केवल उसी की, जो खामोश सपनों पर यकीन करता हो।


एक पुराने बरगद के पेड़ के खोखले में रहता था लूमो, एक छोटा सा जुगनू जो चमक नहीं सकता था।

हर रात वह अपने दोस्तों को आकाश में टिमटिमाते हुए देखता और खुद पत्तों के पीछे छिप जाता।

एक रात, एक गिरता हुआ तारातारा—उसके पेड़ के पास आकर गिरा। वह अपनी राह खो चुकी थी और उसे अपनी ख्वाहिश भी याद नहीं थी।

लूमो ने उसे देखा , थोड़ी देर बाद उसने तारा की मदद करने का सोचा l 

लूमो उसके पास गया  “शायद चाँद झील हमें जवाब दे,” लूमो ने धीरे से कहा।

तारा ने लूमो की बात सुनी फिर उसके साथ जाने के लिए राजी हो ज्ञ l  उनकी यात्रा शुरू हुई।

उन्होंने पार की फुसफुसाती जंगल, गूंजती गुफाएं, और धुंध से भरी पहाड़ियाँ। रास्ते में वे मिले भूली रातों के उल्लू और  नाग जैसे रहस्यमयी जीवों से।

हर पड़ाव पर उन्हें अपने डर का सामना करना पड़ा—लूमो की हीन भावना और तारा की उम्मीद खोने का डर। लेकिन हर बार, उनकी दोस्ती गहराती गई।

उन्हें समझ आया कि चमक सिर्फ रोशनी से नहीं आती—वो दिल से आती है।

आखिरकार, पूर्णिमा की रात, वे चाँद झील पर पहुँचे। झील चाँदी की तरह चमक रही थी। तारा ने अपना हाथ पानी में रखा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। उदास होकर उसने कहा, “शायद अब मेरी कोई ख्वाहिश नहीं बची।”

तभी लूमो, जो अब थोड़ा चमक रहा था, झील के ऊपर उड़ते हुए बोला, “मेरी एक ख्वाहिश है—मैं चाहता हूँ कि तारा को उसकी रौशनी वापस मिल जाए।”

झील में लहरें उठीं, और फिर शांति छा गई। ठंडी हवा बहने लगी और तारा धीरे-धीरे फिर से चमकने लगी। उसे याद आया कि उसकी ख्वाहिश थी—कोई ऐसा साथी मिले जो उसे तारा नहीं, दोस्त समझे।

चाँदनी में नहाकर दोनों दोस्त झील के किनारे बैठे रहे। लूमो की चमक अब एक सुनहरी लौ जैसी थी। झील की धीमी फुसफुसाहट आई—“धन्यवाद, विश्वास करने के लिए।”

उस दिन के बाद से, एक जुगनू और एक तारा साथ-साथ आकाश में उड़ते हैं—कहानियों और सपनों में—सिखाते हैं कि असली रौशनी हमारे दिल में होती है।


कहानी से शिक्षा :

असली रोशनी हमारे भीतर होती है।
छोटा से छोटा जीव भी साहस, दयालुता और सच्ची दोस्ती से बड़ा चमत्कार कर सकता है। बाहरी चमक से ज़्यादा ज़रूरी है दिल की रौशनी।

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