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आज रात बहुत शांत थी । तारा एक छोटी बच्ची जिसे बिल्कुल भी नींद नहीं आ रही थी। उसके घर में आज लाइट भी नहीं था, वह करवटें बदलती रही, पसीने से परेशान।


धीरे से वह बालकनी में आई, जहाँ उसकी प्यारी नानी चाँदनी की रोशनी में  में ऊन से बुनाई कर  रही थीं।

“नानी, मुझे नींद नहीं आ रही,” तारा ने कहा।

नानी मुस्कुराईं, “आ जा मेरी नन्ही तारा।”

तारा उनके गोद में जाकर  बैठ गई। और ऊपर की ओर देखने लगी, ऊपर आकाश में ढेर सारे तारे चमक रहे थे।

“नानी इतने सारे तारे क्यों होते हैं?” तारा ने पूछा।

नानी बोलीं, “हर तारे की एक  कहानी होती  है। कुछ प्यार से चमकते हैं, और कुछ हँसी में टिमटिमाते हैं।”

तारा हँसी, “क्या वो मुझे देख रहे हैं?”

“हमेशा,” नानी बोलीं। “आज हम आकाश को रजाई बना लें।”

नानी ने अपनी शाल तारा के  ऊपर फैला दिया  और बोलीं, “ये है हमारी तारों की रजाई – जो तुम्हें सुकून और मीठे सपनों से भर देगी।” और फिर नानी तारा का सर सहलाने लगी l 

धीरे धीरे तारा गहरी नींद में सो गई l

उस रात तारा चैन से सोई, अपनी प्यारी नानी और तारों की रजाई के नीचे।

कहानी से सीख : 

सच्चा सुकून चीज़ों में नहीं, बल्कि प्यार और अपनापन में होता है।

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