
एक गाँव था, जहाँ हरियाली और चहचहाते पक्षियों से भरा जंगल था। उसी गाँव में रहती थी एक प्यारी सी लड़की — मीना, जिसे प्रकृति से बहुत प्यार था।
एक दिन जंगल में घूमते हुए, मीना को एक चमकता हुआ पत्ता मिला। वह पत्ता सूरज की रोशनी में झिलमिला रहा था।
जैसे ही उसने पत्ता उठाया, एक हल्की सी फुसफुसाहट सुनाई दी,
"जो मुझे सच्चे दिल से थामेगा, वह जंगल की आवाज़ सुन पाएगा।"
मीना हैरान रह गई। लेकिन जल्द ही, उसे पक्षियों की बातें, पेड़ों की कहानियाँ, और नदियों का संगीत सुनाई देने लगा।
एक दिन कुछ लोग बड़ी मशीनें लेकर जंगल में आए। वे पेड़ों को काटना चाहते थे ताकि वहाँ फैक्ट्री बनाई जा सके।
मीना ने जादुई पत्ता थाम लिया और गाँव के बुज़ुर्गों को सारी बातें बताईं।
सबसे पहले किसी ने विश्वास नहीं किया, लेकिन मीना ने हार नहीं मानी।
उसने स्कूल के बच्चों को इकट्ठा किया, जंगल को बचाने के गीत गाए, और लोगों को बुलाया।
अंत में, गाँववालों ने एकजुट होकर जंगल को बचा लिया। फैक्ट्री कहीं और बनी।
मीना ने वह पत्ता उसी जगह रख दिया। हवा में एक आवाज़ आई —
"जब दिल सच्चे और बहादुर हों, तो जादू वहीं आता है।"
कहानी की सीख :
"सच्ची बहादुरी दयालुता से आती है। अगर दिल सच्चा हो, तो एक छोटी सी आवाज़ भी बहुत बड़ा बदलाव ला सकती है।"