
रक्षाबंधन का त्योहार आने वाला था।
गाँव के एक छोटे से घर में दो भाई बहन रहते थे , उनका नाम राजू और सीमा था l राजू और उसकी बहन सीमा बहुत खुश थे। सीमा ने पहले ही अपनी राखी तैयार कर ली थी — एक रंग-बिरंगी राखी जिसमें सितारे जड़े हुए थे।
राजू बोला, “इस बार कुछ स्पेशल होगा बहन, वादा रहा!”
लेकिन सीमा को नहीं पता था कि राजू का ये वादा सिर्फ मिठाइयों का नहीं, बल्कि एक असली रॉकेट का है।
राजू को हमेशा से अंतरिक्ष में जाने का शौक था। स्कूल में विज्ञान उसकी सबसे पसंदीदा चीज थी।
उसने एक पुरानी वॉशिंग मशीन, कुछ टीन के डिब्बे और एक पुराने पंखे की मोटर से एक रॉकेट बनाया।
नाम रखा: "राखी रॉकेट"
राजू बोला, “इस राखी, मैं तुम्हारा तोहफा चाँद पर भेजूँगा, ताकि सारी दुनिया जाने कि एक बहन का प्यार कहाँ तक जा सकता है।”
सीमा हँसते हुए बोली, “तू पागल है क्या?”
पूरे हफ्ते राजू ने मेहनत की। हर दिन वो उस रॉकेट को बनाने में लगा रहता था l पर गाँव के बच्चे उसका मज़ाक उड़ाते थे ,
“गधा रॉकेट बनाएगा?”
“चाँद पर राखी भेजेगा?”
पर राजू उनकी बातो को सुनकर रुका नहीं।
राखी वाले दिन, उसने सीमा की राखी को एक खास कैप्सूल में रखा, और खेत के पीछे बने छोटे से मैदान में "राखी रॉकेट" लॉन्च किया।
रॉकेट सच में कुछ फीट ऊपर उड़ गया!
चाँद तक तो नहीं पहुँचा, लेकिन गाँव के आसमान में उसकी लाइट चमकी।
गाँव के लोग तालियाँ बजाने लगे। सभी लोग राजू की तारीफ़ करने लगे l
सीमा की आँखों में आँसू थे — “मेरा भाई सबसे स्पेशल है!”
राजू बोला, “इस रॉकेट ने दुनिया को नहीं, पर दिल को छू लिया!”
अब गाँव के स्कूल में एक नया विज्ञान क्लब बना, जिसका नाम था —
"राखी रॉकेट क्लब"
कहानी की सीख :
"भाई-बहन का प्यार सिर्फ धागे में नहीं, सपनों और विश्वास में भी बंधा होता है। छोटी उम्र में भी बड़े सपने सच हो सकते हैं अगर दिल सच्चा हो।"