बंटी – बोलने वाला गधा
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एक बार की बात है, सुनहरी घाटी नामक एक गाँव में एक गधा रहता था, उसका नाम  बंटी था 
पर बंटी कोई आम गधा नहीं था, उसके पास एक खूबी थी  — वो बोल सकता था!

लेकिन यह बात सिर्फ और सिर्फ़ उसके मालिक अर्जुन को ही पता थी। अर्जुन गरीब था और ईंटें ढोने का काम करता था।
हर दिन बंटी भारी बोझ उठाता, लेकिन कभी शिकायत नहीं करता।

रात को जब सब सोते, बंटी और अर्जुन बातें करते।
बंटी कहता, “अगर मेहनत करोगे, तो किस्मत भी बदलेगी!”

अर्जुन अक्सर उदास होता, “मेरे पास कुछ नहीं है बंटी... बस तुम हो।”

कुछ समय बाद गाँव में एक मेला लगा l  वहाँ हर कोई अपने जानवरों को सजाकर लाया। घोड़े, ऊँट, हाथी — सब थे।

अर्जुन भी बंटी को ले गया — लेकिन किसी ने गधे की तरफ ध्यान नहीं दिया।

तभी बंटी ने अचानक बोलना शुरू कर दिया!

“गधा हूँ, पर बेकार नहीं। मैं मेहनत करता हूँ, कभी रुका नहीं।
घोड़ा सुंदर है, ऊँट ऊँचा है, पर मैं सबसे भरोसेमंद हूँ!”

सभी बंटी की बाते ध्यान से सुनने लग गए l 

सब चौंक गए।  फिर गाँव के  सभी लोग तालियाँ बजाने लगे।

सभी आपस में बाते करने लगे कि  “अर्जुन का गधा बोलता है! और क्या समझदारी की बातें करता है!”

वहाँ उस मेले में उपस्थित  मंत्री ने कहा, “इस गधे को राजकीय मेले में ले चलो! यह बच्चों को सिखा सकता है मेहनत और सच्चाई का महत्व।”

अर्जुन और बंटी की किस्मत बदल गई। अब वो दोनों रोज़ स्कूलों में जाते और बच्चों को सिखाते —
"कभी किसी को छोटा मत समझो, सबके अंदर एक खासियत होती है।"


कहानी की सीख :

“कभी भी किसी की कद-काठी या रूप से उसका मूल्य मत आँको। हर कोई अपने तरीके से खास होता है। मेहनत और ईमानदारी सबसे बड़ी ताकत है।”